Raksha Bandhan kyu aur kab se banaya jata hai/रक्षा बंधन क्यो और कब से बनाया जाता है?

रक्षा बंधन कब से चला ?

असुरकुल में एक महा दानी हुवे,राजा बलि।उसका नियम था कि जो भी उससे दान चाहेगा,खाली नही जा सकता।
देवताओं को भय खाने लगा,तब बालक रूप में प्रभु आये और तीन पग जमीन मांगी दान में।

गुरु शुक्राचार्य समझ गये, चेले को समझाया कि सावधान ,तेरा काल बन कर ही  भगवान आये है,तू मना कर दे।

राजा बलि बोला, ऐसा अवसर कहाँ मिलेगा,जब प्रभु खुद ही आये है,में तो दूंगा।

मारा गया।तब उसकी आत्मा को प्रभु ने पाताल लोक दिया और वचन मांगने को बोला,तब बलि ने मांगा कि प्रभु आप ही मेरी पहरेदारी करे,रक्षा करे,पाताल लोक में।

प्रभु भी वचन से मजबूर ।चलना ही पड़ा।

तब लक्ष्मी जी अकेली पड़ गई, वह राजा बलि के पास रक्षा बंधन लेकर गई और भाई बनाया।

जब राजा बलि ने बहन से कुछ मांगने के लिये बोला,तो उसने प्रभु को ही मांग लिया।

बस उसी समय से बहने अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधने लगी।


राजा बलि के दादा का नाम प्रह्लाद तथा पिता का नाम विरोचन था। वह महर्षि कश्यप तथा दैत्य हिरण्यकश्यप के कुल में जन्मा एक दैत्य राजा था। वह स्वभाव से अपने दादा के समान दानवीर था।

सवाल उठता है कि ऋषि कश्यप के वंशज असुर कैसे हुवे ?

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