जय राम जी री सा।
वैदिक ज्योतिष में हमारे मुनि जनो ने दैनिक क्रियाकलाप से शुभ परिणाम पाने के लिये कुछ दिशा निर्देश, जातक की कुंडली के आधार पर दिये है।
जैसाकि आप सब ज्ञानी जन जानते है कि पराशर ऋषि ने अपने सूत्रों में फलादेश के नियमावली में विषय के अनुशार जो भाव निर्देशित किये है,उन्ही के आधार पर भाव,भावेश ओर भाव कारक को आधार बना कर परमात्मा के आदेशों को समझने की क्रिया बतलाई है।
जैसे किसी जातक को अपने विवाह के सिलसिले में जानने की जिज्ञासा है तो आदरणीय मुनि जनो ने सप्तम भाव,सप्तमेश ओर शुक्र,जो कि कारक है,से फलादेश करने की आज्ञा दी है।
मुगल काल मे वैदिक ज्ञान को जला दिया गया था,जो ज्ञानी जनो के मस्तिक में था,वहीं बचा,जो गुरु परम्परा के मार्ग से होती हुई,कुछ जगहों पर जीवित रही।
आधुनिक काल मे साउथ के एक महान ज्ञानी ने इस विषय पर गहन अध्यन किया और एक पद्धति ने जन्म लिया जो वैदिक ओर वेस्टर्न एस्ट्रोलॉजी का मिश्रण थी। जिसे कृष्णा मूर्ति पद्धति के नाम ने जाना जाता है।
आईये आज इस कुंडली के आधार पर ज्योतिष के सूत्रों को समझने का प्रयास करते है।
चुकी जातक ने वैवाहिक जीवन,जीवन साथी के सिलसिले में सवाल किया है,तो सप्तम भाव,भावेश,भावकारक से समझने का प्रयास करते है।
कुम्भ लग्न की कुंडली मे सप्तम भाव मे सिंह राशि आती है,जिसमे कोई ग्रह निर्वासित नही है,सप्तम भाव पर मंगल की दृष्टि है।जो सप्तम भाव से योगकारक ग्रह है।
सप्तम भाव का मालिक सूर्य अपने भाव से एकादश स्थान में,बुध की राशि मिथुन में है,जिसका सूर्य के साथ सम भाव रखता है।
सूर्य पर किसी भी ग्रह की दृष्टि नही है।
कारक शुक्र बनता है,जो वर्षभ राशि मे स्वग्रही है और गुरु से द्रष्ट है।
सप्तमेश सूर्य का पंचम भाव और शुक्र पर गुरु की दृष्टि से दो बातें निकल कर आती है,पहली की इनकी पत्नी किसी धार्मिक परिवार से आयेगी, ओर सूर्य की कम डिग्री की वजह से कद ज्यादा नही होगा।दुशरा नम्बर पर हम जान सकते है कि जातक के घर से पश्चिम दिशा से आयेगी।
चुकि सेपरेटिव प्लेनेट्स को दृस्टि नही इसलिये वैवाहिक जीवन सुख शांति से गुजरेगा।
सप्तम भाव पर मंगल की दृष्टि है,जो स्वभाव में तेज या जिद्दीपन की ओर संकेत देता है।मंगल एनर्जी का कारक है इसलिये हर कार्य को तेजी से सम्पन करने की ओर संकेत भी मिलते है।
कृष्णा मूर्ति में हाउस के कारक लिये जाते है,2,7,11 भाव से घटना कब घटित होगी ,देखी जाती है।
भाव कुंडली,जिए कस्प कुंडली भी बोला जाता है,से ही ग्रहो के सूत्रों कप जोड़ा जायेगा।
2nd हाउस में-मून है।मून के नक्षत्र पर शुक्र और राहु है।
सप्तम भाव मे कोई नही,सप्तमेश सूर्य के नक्षत्र पर शनि है।
लाभ भाव मे कोई ग्रह नही,ना ही लाभेश के नक्षत्र पर कोई ग्रह निर्वासित।
सूर्य के जब शुक्र लगा,जातक की सगाई हुई।
पत्नी एक धार्मिक परिवार से ही आई।
जातक के घर से पश्चिम दिशा में ही शादी हुई।
पत्नी का कद भी औसत ही निकला।
स्वभाव भी तेज ही निकला।
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