वैदिक ज्योतिष मे हमारे ऋषि मुनि जनों ने निर्देश किया है कि जातक कि कुंडली मे भाग्य स्थान के स्वामी के अधीन आने वाले देवता कि पूजा शुभ फलदायक रहती है ।
इसे निर्धारित करने के लिये सबसे पहले हमे बली लग्न को निर्धारित करना पड़ता है । लग्न ,चंद्र लग्न ओर सूर्य लग्न मे जो बली होगा उसी पर इसे लागू करना होगा।
लग्न का अधिपति अपने भाव से 6/8/12 भाव मे हो,नीच राशि मे हो ,शत्रु राशि मे हो या अस्त हो,या पाप ग्रहो के मध्य मे हो ,पाप ग्रहों कि दृष्टि से पीड़ित हो तो उस लग्न को कमजोर माना जाता है।
- मेष राशि बली हो तो भाग्य स्थान का मालिक गुरु होगा ओर गुरु ग्रह के देवता भगवान विष्णु,नारायण,कृष्ण की पूजा से भाग्य जागता है।
- वर्षभ राशि बली हो तो नवम स्थान में मकर राशि आती है। जिसका मालिक शनि होने के कारण जातक को माँ काली उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- मिथुन राशि बली हो तो नवम स्थान में कुम्भ राशि आती है। जिसका मालिक शनि होने के कारण जातक को शिव उपासना उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- कर्क राशि बली हो तो नवम स्थान में मीन राशि आती है। जिसका मालिक गुरु होने के कारण जातक को माँ सरस्वती की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- सिंह राशि बली हो तो नवम स्थान में मेष राशि आती है। जिसका मालिक मंगल होने के कारण जातक को हनमान जी, कार्तिके जी, श्री राम, की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- कन्या राशि बली हो तो नवम स्थान में वर्षभ राशि आती है। जिसका मालिक शुक्र होने के कारण जातक को श्री साधना, लक्ष्मी की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- तुला राशि बली हो तो नवम स्थान में मिथुन राशि आती है। जिसका मालिक बुध होने के कारण जातक को भगवान गणेश की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- वृश्चिक राशि बली हो तो नवम स्थान में कर्क राशि आती है। जिसका मालिक चंदमा होने के कारण जातक को माँ गंगा की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- धनु राशि बली हो तो नवम स्थान में सिंह राशि आती है। जिसका मालिक सूर्य होने के कारण जातक को भगवान सत्यनारायण,गायत्री की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- मकर राशि बली हो तो नवम स्थान में कन्या राशि आती है। जिसका मालिक बुध होने के कारण जातक को माँ दुर्गा की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- कुम्भ राशि बली हो तो नवम स्थान में तुला राशि आती है। जिसका मालिक शुक्र होने के कारण जातक को लक्ष्मीनाथ,श्री सूक्त की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।
- मीन राशि बली हो तो नवम स्थान में वृश्चिक राशि आती है। जिसका मालिक मंगल होने के कारण जातक को माँ चामुंडा की उपासना से भाग्य उदय में शुभ फलदायक रहती है।