ज्योतिष शब्द ज्योति+ईश से बना है,ऐसा मेरे बाबा ने बताया था। जिसका अर्थ होता है,तेजोमय ईश्वर।
आप इसे सूर्य से भी जोड़ सकते है,जो प्रत्यक्ष दिखाई देता है।
इस विद्या में सूर्य को राजा बोला गया है।ओर सारी गणना का आधार बिंदु भी यही है,इसी के उदय के आधार पर लग्न निर्धारित होता है,जिससे जातक के योगायोग देखे जाते है,भाव देखा जाता है।भावेश देखे जाते है।केंद्र/त्रिकोण देखा जाता है।सारी शुभ और अशुभ योग इसी के आधार पर देखे जाते है।
सूर्य की राशि के आधार पर घटना घटने की गणना की जाती है जिसे ट्रांजिट बोलते है।
इसके उदय के आधार से बने लग्न के तत्व की राशि से जातक के जीवन मे आने वाली बीमारी का इलाज भी सम्भव है,जैसे वायु तत्व राशि के लग्न मिथुन,तुला,कुम्भ के जातक यदि प्राणायाम को आधार बनाये तो अच्छे स्वास्थ को पाने में सफल हो सकते है।
ऐसे जातक बुद्धि के कौशल में भी निपुर्ण पाए जाते है।यदि बुध से सम्बंध बने तो।
मारुति की पूजा इसको लाभ दे सकती है।
गैसों के जानकार भी हो सकते है,या इनके व्यपार में भी सफल हो सकते है।
चुकी मिथुन (बुध) /तुला (शुक्र)/ कुम्भ (शनि) तीनो के स्वामी अलग अलग है इसलिये कार्य विशेष भी स्वामी के अनुशार बदल जायेगा।
ऐसे ही सभी राशि और उसके स्वामी को विस्तार से रिसर्च में डाल अध्यन किया जाता है।
जोशी रिसर्च सेंटर
जोशिवाड़ा,बीकानेर
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