अक्सर यार दोस्तों से आप ऐसा सुनते आये होंगे कि उनके विचार काफी लोगो से नहीं मिलते.
तो जनाब मेरे मस्तिक में पहला सवाल ही ये आया की इन्शान के विचार बनते कैसे हे और इक सामान्य व्यक्ति कैसे अपने को विचारो में कैद कर लेता हे ?
(1) जन्म लेते ही इन्शान के माता पिता उसे जाति के विचार दे देते हे .और वह जाति के उसी विचार को अपना लेता हे ,या यु कहे की वह उसी विचार को अपना मानने लगता हे .इसे आप विचारो की कुटुंबी मशीन कह सकते हे .
(2) बच्चा जब कुछ बड़ा होता हे ,तो अकेला नहीं रह सकता ,यार दोस्तों के साथ चाहिए खेलने के लिए ,तब वह अपने दोस्तों से विचार लेकर अपने मस्तिक में भरने लगता हे .
(3) अब वह स्कूल जाने को लगता हे ,तो सरकार द्वारा दिया जाने वाले विचारो को ग्रहण करता हे ,और उसे ही कालान्तर में अपना कहने लगता हे .
(4) अब साब, बच्चा सयाना होने लगा हे और मीडिया के प्रभाव में आता हे ,रेडियो ,टीवी ,और सिनेमा देखने जाता हे ,और अपने दिमागी रूपी बैंक में और नए विचार भर ले आता हे .
(5) रात काफी हो चुकी ,कॉलेज की छुट्टियां चल पड़ी ,तो साब क्यों नहीं किसी नॉवल या बुक को पढ़ा जाए ,बस इन्ही से और विचारो को मस्तक में भरा जाये.
(6) वेलकम इन मॉर्डन सोसल साइट्स - बदलते युग में इनसे भी आपको विचार दिए जाते हे और आम जन उन विचारो को भी अपना ही बताने लगता हे .
अब मेरे सर में इक सवाल आता ही रहता हे ,कि सीधे सादे इन्शान को ये समझ ही क्यों नहीं आता कि जिन विचारो को आप अपना कह रहे हे ,वो तो आप के हे ही नहीं .फिर उनसे परेशान क्यों ?
याद रखे विचार आप में डाले जा रहे हे ,बस आपको इस बारे में मालुम नहीं या आप बेपरवाह हे इस सिलसिले में .
यदि आप इन( विचारो) को स्वीकार नहीं करते तो निश्चित रूप से देव हे ,नबी हे.
शायद इसीलिए शास्त्र में मुनि जनो ने कहा हे कि ब्रह्मा जी ने विचारो से ही इस सृस्टि का निर्माण किया .
उम्मीद हे आप भी मंथन करके अपने और पराये विचास को पहचान सके तो अमृत पर आपका अधिकार भी निश्चित ही जाने .
अमृत क्या हे ?
परमशांति.